मैं पापा कहता था। पापा अपने पिता को बाबूजी कहते थे। कुछ लोग डैडी कहते हैं। कुछ अब्बा कहते हैं। जो अपने बाप के अंतिम संस्कार में नहीं गया वह इनमें से किसी का भाव नहीं समझ सकता। जिसने अपने पिता को कंधा दिया है, उनसे स्नेह किया है वह किसी के #AbbaJaan का मज़ाक़ नहीं उड़ा सकता।

Sep 12, 2021 · 6:31 PM UTC

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Bhai ek bar tweet wapas padh lijiye.
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Replying to @Ashok_Kashmir
ऐसे लोग पैदा ही नफरत से हुए है!
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Replying to @Ashok_Kashmir
संन्यासी अपने बाप की अंतिम क्रिया नहीं करवा सकता। आदित्यानाथ या कोई और।
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सन्यासी तो गद्दी पर भी नहीं बैठ सकता।
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Replying to @Ashok_Kashmir
भाई आप एक जहरीले और दंगाई से सभ्यता और संस्कृति की उम्मीद करते हैं अफसोस इस आदमी की पूरी जिंदगी दंगा फसाद और धर्म के नाम पर हत्या करने करवाने में गुजर गई है मुख्यमंत्री बनने की कोई योग्यता नहीं थी मगर आरएसएस बीजेपी ने इसके अंदर भरे जहर और नफरत की वजह मुख्यमंत्री बनाया
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Replying to @Ashok_Kashmir
पब्लिसिटी के लिए कुछ भी कर सकते है।। एक CM के लिए 500 से 1000km की दूरी कुछ नही है।। लेकिन बाप के मरने में न जाकर बाबा जी ने नादान जनता के साथ बिना हॉस्पिटल, बिना दवा, बिना आक्सीजन, के मासूम जनता के भवनाओं के साथ खेल गए ।।।
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जिसे बाप के मरने का गम न हो वह public के मरने पर क्यो विचलित होगा ? गंगा में लाशें देख कर आप हम विचलित हो सकते है इन्हें कोई फर्क नही पड़ता गंगा हो या ट्रेन का डिब्बा
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