Professor and Intensivist, Anaesthesiology & Critical Care, IMS-BHU, Varanasi. Poet and Author (URVI; KAVI-KOVID) speakingtree.in/rajeev-dubey…

Varanasi
Joined January 2015
Urvi / उर्वी: काव्य-चयनिका / Anthology of Poems Paperback ₹199 144 pages Hindi Notion Press This book 'Urvi' (or Mother Earth) is a compilation of poems that are profoundly connected with Indian values and ethos.
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Replying to @ZSiddiki
Unfortunately both have been heavily commercialized, and gone beyond the reach of the poor.
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Replying to @awasthis
@ABPNews #निर्भर आदिगुरु हम थे निरापद, शून्य, ज्योतिष के विशारद। शल्य-आयुर्वेद-शोधन– शिष्य बन था विश्व गदगद। बूँद-भर थी प्यास जग की देश था जब ज्ञान-सागर। फिर बनें हम आत्म-निर्भर।
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Replying to @awasthis
@ABPNews #तूफान खुदगर्ज़ी की मौत मयस्सर तो होनी है, हो जायेगी। खुद्दारी पर मर मिटने की घड़ी नहीं वापस आयेगी। ख़ाक-ए-वतन के ज़र्रे से जो उठता, तूफान अलग है। अगर कफ़न का रंग तिरंगा हो, उसकी फिर शान अलग है।
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Replying to @Kanisha801
अतीव सुन्दर पंक्तियाँ म्
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Replying to @sonalirathor95
नेत्र हैं टँके हुए आज तव समाधि पर। कोटिश: नमन तुम्हें रत्न देश के अमर!