Joined May 2021
बुलडोजर की जरूरत उन जान लेवा इमारतों पर है, जो परिवार उजाड देती है, जिनसे हम चंदा लेकर चुनाव जीत जाया करते हैं उन परिवार पालती रेहडी पटरी खोमचे खोखे फुटपाथ पर मजबूरी बसती है, वो अतिक्रमण नही , विफलता है अदालते जनता की होनी चाहिए सरकार तो अपने आप में मजबूत है
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काग्रेस ही विकल्प, बाकी सब अल्प
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शिक्षित ईमानदारी मेहनती हर कार्य में निपुण तनखाह 60 लीटर पेट्रोल प्रति माह आप हमारा साथ दें, मंहगाई में हम आपके साथ है
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भूखा हिन्दु या खुशहाल हिन्दुस्तान फैसला आपका
सेलेरी क्लास तैयार रहो, जमा पर ब्याज में कमी पीएफ ब्याज में कमी पीएफ पर टैक्स जॉब अपोर्चुनिटी में कमी जॉब इंनक्रीमेंट में कमी कोरोना में सेलेरी कट के बाद शेयर बाजार कभी भी धोखा दे सकता है, सावधान व सतर्क रहे, याद रहे आपका टैक्स सरकार के वोट खरीदने के काम आता है
तुम मुझे टैक्स दो, मैं तुम्हें मंहगाई दूंगा
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चैन से नही रहने दूगा, पेट्रोल तेल गैस मंहगी बेरोजगारी पीएफ की ब्याज रेल में वरिष्ठ नागरिक बचत पर ब्याज कोरोना ऑक्सीजन कोरोना मौत किसान बिल हिन्दु मुस्लिम लोक डाउन
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नया भारत केवल चुनाव जीतने का लक्छय रखता है ,सरकारी संस्थाऐ मानो अस्तित्व खो चुकी हो या पंगु दिखती हों,निजी संस्थाऐं मानो देश खरीदने की तैयारी में हों
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हिन्दुस्तान का सबसे बडा नुकशान उच्च अधिकारी भी नेता जैसे हो गऐ , उनको भी चुनाव में टिकट की चिंता सता रही है इस्तेमाल काबिलियत का होना था, इस्तेमाल सहयोग का हो गया , यह समस्या भ्रष्टाचार से भी बडी है
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शिक्षा का व्यवसायीकरण ही बेरोजगारी है, शिक्षा की चिंता छोड़ दो,शिक्षा किस भाव है यही चिंता का कारण है व्यवसायिक शिक्षा का अर्थ व्यवसाय से पहले शिक्षित होना , न कि शिक्षित होने के बाद व्यवसाय ढूड़ना
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आप काग्रेस से नाराज है, यदि कांग्रेस आपसे नाराज हो जाऐ तो
रोजगार ईलाज सुरक्षा शिक्षा का संघर्ष की उम्मीद काग्रेस से है बेहतर है मतदाता अपने संघर्ष के लिऐ स्वंय तैयारी कर लें मंहगाई टैक्स मनमानी प्रशासनिक अत्याचार व मौतों की लडाई स्वंय लडे आपकी सरकारी नौकरी,पेंशन लगभग खत्म होने को है,धन कमाने का मौका किसी का दिया है,अब पुन्न कमाऐ
सत्ता के लालच के कारण मैं उधोगपति के दबाव में था फिर किसानों के दबाव मे आ गया आज गरीब मजदूर किसान युवाऔ के दबाव में अपने आप को देख रहा हू कारण एक ही है,नाकाबलियत ईमानदारी से ज्यादा जरूरी काबलियत मनमोहन पर चुटकला सुनाया जा सकता है उनके बराबर कर पाना हर किसी के वश की बात नही
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विदेश मंत्रालय व स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता को मुसीबत में वक्तव्य देते देखा गया, यदि उद्घाटन शिलान्यास होता मान्यनीय मोदी जी स्वंय वक्तव्य देते यदि टैक्स में छूट दी जाती तो राजनैतिक अहसान दिखाया जाता
सही का न चुन पाने से ज्यादा खतरनाक है गलत का चुन जाना जाति धर्म पार्टी से ऊपर उठकर सही सम्मानित व्यक्ति को चुनकर राजनैतिक स्वच्छता अभियान चलाऐं
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न ही यह पहला युध्द है, न ही यह पहला इवैकुऐशन, न ही पहली महामारी थी, न ही पहली बाढ, न ही पहली बार काश्मीर में सेना,न ही पहला कुम्भ , न ही पहली बार दीपक हर बार बस समारोह,चाहे स्टेशन पर झाढू ही क्यों न लग रही हो,चाहे स्टेशन पर घूमने का मन कर आया हो, चाहे मोर को दाना खिलाया हो,
हैल्थ इंसोरेस एक धोखा टीपीऐ मतलब पैसे लेने वाला गायब,अपनी जिम्मेदारी दूसरो पर डालें सरकार की मंसा बस सर्विस टैक्स टीपीए कैश लैस में खुश,अस्पताल के साथ सांठगांठ से झूठे बिना जरूरत के बिल,मरीज का इलाज बीमा राशि पूरा होने के बाद डायरेक्ट इलाज के बिल पास नही होगे
अस्पताल की इमारत शिक्षा व इलाज नही दे सकती उसके लिऐ सरकारी इच्छा शक्ति चाहिए मंहगी शिक्षा झूठे उद्घाटन हमको विदेशी शिक्षा की तरफ ले जाती है,जिसका परिणाम आज हम देख रहे है जब मरीज डॉक्टर अस्पताल और पैसा तीनों है तो शिक्षा बाहर क्यों, गलती किसकी नही, सही करना जरूरी
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निजीकरण का लाभ यूक्रेन से देश वापस आने की टिकट 26 हजार की बजाय 86 हजार, यह घोर निंदनीय है, हर सभव मदद की जाऐगी, मानन्यीय मोदी जी के ऩेतृत्व में कडी कार्यवाही की जा रही है, लेकिन यह मसला राज्य का नही है न ही नेहरू की नीति जिम्मेदार है ,
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जो दान चढावे पर सम्पत्ति बनाते है वो ही धर्म में उलझाते है