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सब-कांसियस मन ध्यान का मार्ग- सब-कांसियस मन की सक्रियता के बिना ध्यान में प्रवेश करना असंभव है! सब-कांसियस मन का उपयोग कैसे किया जा सकता है? हमारा सारा तनाव,सारा टेंशन मन के तीसरे तल सब-कांसियस यानि अवचेतन मन के सक्रिय नहीं हो पाने के कारण ही है!! जय महादेव
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मन के चार तल हैं।पहला चेतन मन (conscious mind),दूसरा अचेतन मन (unconscious mind),तीसरा अवचेतन मन (subconscious mind)और चौथा है अति-चेतन मन(super conscious mind) चेतन मन,मन का पहला तल है जो सोच-विचार करता है।कल्पना करता है, जो सारे दिन या तो भविष्य की किसी योजना पर विचार करता है

Oct 6, 2022 · 8:15 AM UTC

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यानि चेतन मन दिन भर सक्रिय रहता है। दूसरा तल अचेतन मन है,जो हमारे शरीर के नींद में प्रवेश करने के बाद सक्रिय होता है। अतीत की यादें और भविष्य के सपने अचेतन मन में दर्ज होते हैं। इसलिए नींद में प्रवेश करने के बाद यह हमें सपने दिखाता है और हमारी इच्छाओं,आकांक्षाओं को पूरा करने का
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और अचेतन मन रात को नींद में प्रवेश करने के बाद सक्रिय होता है जब हम सपने देखने लगते हैं! तीसरा तल है अवचेतन यानि सब-कांसियस माइंड! सब-कांसियस सक्रिय होता है चेतन और अचेतन दोनों के सो जाने के बाद! आधी रात के बाद , जब हमारा शरीर गहरी नींद में प्रवेश करता है।
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तब हम अवचेतन मन में प्रवेश कर जाते हैं। जहां विचार और स्वप्न दोनों नहीं होते हैं! क्योंकि विचार चेतन मन में चलते हैं और सपने अचेतन मन में चलते हैं!!अवचेतन निर्विचार का केंद्र है जहां पर सिर्फ उर्जा का भंडार है। हम दिनभर काम करके थक जाते हैं और रात को गहरी नींद में जाकर अवचेतन मन
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से फिर से उर्जा ले लेते हैं। यानि अवचेतन मन हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है। चेतन, अचेतन और अवचेतन, हमारा सारा जीवन इन तीनों तलों पर ही डोलता रहता है। जिसमें हम चेतन मन और अचेतन मन का तो बहुत उपयोग करते हैं लेकिन अवचेतन मन का उपयोग नहीं कर पाते हैं।
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सारे तनाव सारी परेशानियां अवचेतन मन से दूरी बनाने के कारण से ही हैं।जब तक हम मन के तीनों तलों का उपयोग नहीं करेंगे हम तनाव में रहेंगे और ध्यान में प्रवेश करना मुश्किल होता रहेगा। हम दिन में सोच-विचार और काम करते हुए चेतन मन का पूरा उपयोग करते हैं...
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सारे तनाव सारी परेशानियां अवचेतन मन से दूरी बनाने के कारण से ही हैं। जब तक हम मन के तीनों तलों का उपयोग नहीं करेंगे हम तनाव में रहेंगे और ध्यान में प्रवेश करना मुश्किल होता रहेगा। हम दिन में सोच-विचार और काम करते हुए चेतन मन का पूरा उपयोग करते हैं और हमारा अचेतन मन भी हमें सपने
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दिखाता है और सक्रिय रहता है। लेकिन हमारा मन का तीसरा तल अवचेतन सक्रिय नहीं हो पाता है क्योंकि हम गहरी नींद में प्रवेश नहीं कर पाते हैं। गहरी नींद में ही हमारा अवचेतन मन सक्रिय होता है। और हमें उससे उर्जा मिल पाती है।
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हम दिनभर काम करते हैंतो रात को गहरी नींद में हमें अवचेतन से पुनःफिर उर्जा मिल जाती है और हम सुबह ताजा अनुभव करते हैं।यदि हम सारी रात सपने ही देखते रहते हैं और गहरी नींद में हमारा अवचेतन मन सक्रिय नहीं होता है तो हम सुबह थकानऔर तनाव महसूस करते हुए उठतेहैं जैसे नींद पूरी नहीं हुईहो
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