ज़िंदगी सँवारने को तो ज़िंदगी पड़ी है ,वो लम्हा संवार लो जहाँ ज़िंदगी खड़ी है । #SaturdayMorning #GodMorningSaturday
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Replying to @anjali_speak
"ज़िन्दगी से बड़ी कोई सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं"। "इतने हिस्सों में बट गया हूं मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं"। (कृष्ण बिहारी नूर)

1:13 AM · Oct 9, 2021

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