भगवान परशुराम के वंसज भगवान राम के सेवक और देवों के देवमहादेव माँ गौरी के भक्त हैं यही हमारा कर्म हिन्दू धर्म और यही हमारी पहचान है जय श्री राम जय महाकाल 🚩🚩

Ghaziabad, India
Joined May 2016
😡😡😡 Yahi hai asli Samajwadi party
समाजवादी पार्टी में शामिल हुए तेजिंदर सिंह विर्क। लखीमपुर खीरी हिंसा में BJP कार्यकर्ता की हत्या का है आरोप।
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Replying to @Trishul_Achuk
क्या कांग्रेसी हिन्दू नहीं हैं..?? हाँ...कांग्रेसी हिन्दू नहीं है??? जो ऐसे खानदान के तलवे चाटते हैं ... जिस खानदान के परिवार के रगों में किसी हिंदू का खून ना हो.. और जो परिवार हिंदू विरोधी हो.. तो उनका समर्थन करने वाले कांग्रेसी कैसे हिंदू हो सकते हैं??
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Pratibha Mishra retweeted
Replying to @Trishul_Achuk
मुद्दा आरएसएस या भाजपा है ही नहीं, कांग्रेस का मुख्य मुद्दा तो हिंदुत्व का विनाश करना है,यही बात मूर्ख हिन्दू समझने के लिए तैयार ही नहीं !😡😡
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बस यही गांधी, नेहरू और कांग्रेस को बर्दाश्त न हुआ क्या किसी कांग्रेसी को विवेकानंद जी की जयंती मनाते और स्मरण करते देखा....? क्या कांग्रेसी हिन्दू नहीं हैं..?? सवाल करना सीखिये... कब तक बचाव में जवाब और सफाई देते रहोगे। 🚩🚩जय श्री राम🚩🚩 End
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कांग्रेस की हिन्दुओं और हिन्दू संस्कृति के प्रति नफरत देखनी हो तो विवेकानंद जी का तिरस्कार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ... क्या विवेकानंद जी का कोई भाषण या लेख पढ़ा जो दूसरे धर्म के खिलाफ हो...बल्कि वो हिन्दू धर्म की लकीर को दूसरों से बड़ा करना चाहते थे..... C6 👇
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हिन्दुओं के उत्थान और संस्कृति की बात करते थे ... हिन्दुओं की एकता की बात करते थे.... हिन्दुओं के भगवा वस्त्र धारण कर सन्यासी की तरह रहते थे... यह वजह थी कांग्रेस की विवेकानंद के प्रति नफरत की। यहां तक कि विवेकानंद जी का निधन भी 1902 में हुआ था, फिर भी नफरत... C5 👇
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आखिर कांग्रेस द्वारा विवेकानंद जी से घृणा की बजह . . . ? जबकि जनसंघ (बीजेपी) तो 1964 और आरएसएस 1925 में पैदा हुई, और विवेकानंद जी 1893 में शिकागो गए... फिर भी कांग्रेस का विवेकानंद जी से नफरत करने की बजह क्या है...? . . क्योंकि विवेकानंद हिन्दुओं की बात करते थे ... C4 👇
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फिर विवेकानंद जी ने क्या पाप किया था कि कांग्रेस के पन्नों से विवेकानंद जी गायब रहे हैं..... क्या सुभाष चंद बोस हों, क्या सरदार पटेल हों या लाल बहादुर शास्त्री, BJP ने कभी उन्हें कांग्रेस का नेता मानकर भुला दिया या अपमान किया...? C3 👇
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मुझे आप सब से जबाब चाहिए... विवेकानंद जी को क्या BJP ने शिकागो की धर्म संसद में भेजा था..?? क्या विवेकानंद जी को आरएसएस ने शिकागो की धर्म संसद में भेजा था नहीं ....?? क्या विवेकानंद हिन्दुओं के संत न होकर BJP के संत थे? C2 👇
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तारीफ करनी पड़ेगी यह दोनों अखबार मुलायम सिंह यादव की गुंडागर्दी के सामने नहीं झुके यह समाजवादी गुंडों की सच्चाई छापते रहे और इन दोनों अखबारों के सच्चे रिपोर्टिंग का नतीजा है कि उत्तराखंड बनने के तीन दशक बाद भी उत्तराखंड में कभी समाजवादी पार्टी अपना पैर नहीं जमा सके..!! 🔚🚩🚩🙏🙏
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सुप्रीम कोर्ट धृतराष्ट्र बना हुआ था भारत के प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव धृतराष्ट्र बने थे भारत के राष्ट्रपति चुप थे एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और प्रेस काउंसिल आफ इंडिया भी चुप थे किसी ने भी मुलायम सिंह यादव के इस दमन के खिलाफ आवाज नहीं उठाई लेकिन इन दोनों अखबारों की 👇👇1⃣2⃣
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और कार्यालय का गेट ताला बंद कर देते थे और रात को 1:00 बजे तक कर्मचारियों को जिसमें महिला कर्मचारी भी थी ऑफिस में रोककर छानबीन की जाती थी मुलायम सिंह यादव ने सरकारी विज्ञापन इन दोनों खबरों को देना बंद कर दिया था इस घटना में सबसे अफसोस बात यह है उस वक्त भारत का 👇👇1⃣1⃣
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पर श्रम विभाग के अधिकारी जाते थे छोटी से छोटी गलती पकड़ते थे कि जैसे लेडीज बाथरूम और पुरुष बाथरूम में कितना डिस्टेंस है या प्रॉपर साइन बना है कि नहीं बना है सबका पीएफ जा रहा है कि नहीं जा रहा है दमन इस स्तर तक बढ़ गया था कि अचानक श्रम विभाग के अधिकारी पुलिस लेकर जाते थे 👇👇🔟
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उन जीपों को जला दिया गया पांच कार्यालय जला दिए गए कई दुकानें जला दी गई इतना ही नहीं चुकी राज्य सरकार के पास ईडी या सीबीआई जैसी संस्था तो नहीं होती लेकिन श्रम विभाग होता है तो मुलायम सिंह यादव ने श्रम कानून के आड़ में इन दोनों अखबारों का खतरनाक दमन किया हर अखबार हर दफ्तर 👇👇9⃣
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मुख्यमंत्री ऐलान कर दें तब भला समाजवादी गुंडे कहां रुकने वाले हैं और मुलायम सिंह यादव के इस ऐलान का सबसे बड़ा असर बेचारे गरीब हॉकर्स पर हुआ जो साइकिल से अखबार बेचने जाते थे हॉकर्स को मारा पीटा गया उनकी साइकिल तोड़ दी गई जिस जीप में दैनिक जागरण और अमर उजाला अखबार आते थे 👇👇8⃣
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कहीं भी दैनिक जागरण और अमर उजाला पेपर दिखना नहीं चाहिए जिस दुकान पर इन अखबारों को बिकते देखो उस दुकान को जला दो क्या आप विश्वास करेंगे कि एक प्रदेश का मुख्यमंत्री इस तरह का एलान करें जी हां यह कुकर्म भी समाजवादी पार्टी के गुंडे ने किया था और फिर जब उत्तर प्रदेश का 👇👇7⃣
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दैनिक जागरण और अमर उजाला उनकी पोल खोल रहा है तो मुलायम सिंह यादव ने 10 अक्टूबर 1994 को भरी सभा में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि तूम लोग इन अखबारों के खिलाफ हल्ला बोल का ऐलान करो इनके ऑफिस पर हमला करो इनके दफ्तर को जलाओ इनके हॉकर्स को मारो पूरे प्रदेश में 👇👇6⃣
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अखबार दैनिक जागरण और अमर उजाला इन सभी घटनाओं की रिपोर्टिंग कर रहे थे घटनाओं का फोटो छाप रहे थे वही कुछ अखबार जैसे राष्ट्रीय सहारा, आज और अंग्रेजी के टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स मुलायम सिंह यादव के गुलाम बने थे फिर मुलायम सिंह यादव ने देखा कि यह दोनों अखबार 👇👇5⃣
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